अरविंद श्रीनिवास: वो IIT बॉय जो Google को चैलेंज कर रहा है – Perplexity AI की अनसुनी कहानी
कल्पना करो – 2015 में चेन्नई के IIT मद्रास हॉस्टल में एक साधारण कमरे में बैठा एक लड़का रात-रात भर कोडिंग करता था। Google उसके लिए भी बस एक सर्च इंजन था, जैसे हम सबके लिए। कोई नहीं सोच सकता था कि वही लड़का आज Google जैसे ट्रिलियन-डॉलर जायंट को सीधे टक्कर देगा।
उस लड़के का नाम है अरविंद श्रीनिवास – Perplexity AI के फाउंडर और CEO। आज उनकी कंपनी की वैल्यूएशन $20 बिलियन के आसपास पहुंच चुकी है, और ये AI-पावर्ड सर्च टूल Google के लिए सबसे बड़ा थ्रेट बन गया है।
तो आखिर कैसे एक मिडिल-क्लास फैमिली से आने वाला लड़का इतनी जल्दी इतना बड़ा कमाल कर पाया? और Perplexity को बाकी AI टूल्स से क्या खास बनाता है? चलिए स्टेप बाय स्टेप देखते हैं।
शुरुआत: IIT मद्रास और वो पहला टर्निंग पॉइंट
अरविंद चेन्नई के एक सिंपल मिडिल-क्लास परिवार से हैं। स्कूल के बाद उन्हें IIT मद्रास में एडमिशन मिला, जहां इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ब्रांच अलॉट हुई। जबकि उनके दोस्त कॉलेज लाइफ, पार्टी और सोशल सर्कल एंजॉय कर रहे थे, अरविंद रातों-रात कोडिंग और मशीन लर्निंग में डूबे रहते थे।
उस वक्त उन्हें मशीन लर्निंग का बेसिक आइडिया भी नहीं था, लेकिन उन्होंने एक ML कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया – बिना ज्यादा तैयारी के। और जीत गए! यही वो मोमेंट था जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने महसूस किया कि AI में कुछ बड़ा करने का मौका है।
आगे का सफर: बर्कले PhD और टॉप AI लैब्स में इंटर्नशिप
2017 में अरविंद UC बर्कले चले गए, जहां उन्होंने कंप्यूटर साइंस में PhD की। इसी दौरान उन्होंने 2018-2019 में OpenAI, Google Brain और DeepMind में रिसर्च इंटर्नशिप की – ये तीनों दुनिया की सबसे टॉप AI लैब्स हैं।
इन अनुभवों से उन्हें एक बात क्लियर हुई: परफेक्ट सर्च सिर्फ लिंक्स देना नहीं, बल्कि यूजर को डायरेक्ट, समझने लायक और ट्रस्टवर्थी जवाब देना है।
ChatGPT का आना और वो बड़ा गैप
नवंबर 2022 में ChatGPT लॉन्च हुआ और पूरी दुनिया बदल गई। लोग पहली बार ऐसे AI से बात कर रहे थे जो ह्यूमन जैसा लगता था। लेकिन समस्या ये थी:
- ChatGPT रियल-टाइम इंफॉर्मेशन नहीं देता था।
- सोर्सेज दिखाता नहीं था, जिससे ट्रस्ट इश्यू होता था।
दूसरी तरफ Google था – जो ढेर सारे लिंक्स देता था, लेकिन जवाब डायरेक्ट और कन्वर्सेशनल नहीं होता।
अरविंद ने इसी गैप को देखा और सोचा – क्यों न एक ऐसा AI बनाया जाए जो दोनों की बेस्ट चीजें कम्बाइन करे? रियल-टाइम इंटरनेट डेटा + कन्वर्सेशनल जवाब + हर क्लेम के साथ क्रेडिबल सोर्सेज।
Perplexity का जन्म: स्मार्ट स्ट्रेटेजी से बड़ी चुनौती पार
अक्टूबर 2022 में अरविंद ने Perplexity शुरू किया। सबसे बड़ा चैलेंज था – अपना AI मॉडल ट्रेन करने में अरबों डॉलर लगते हैं। अरविंद ने स्मार्ट तरीका अपनाया: खुद का मॉडल बनाने की बजाय, दुनिया के बेस्ट एक्सिस्टिंग मॉडल्स (जैसे GPT, Gemini, Llama) को API के जरिए इंटीग्रेट कर लिया।
इससे:
- इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट बहुत कम हुई।
- किसी एक मॉडल पर डिपेंडेंसी नहीं रही।
- फ्यूचर में कोई मॉडल प्रॉब्लम आए तो आसानी से स्विच कर सकते हैं।
7 दिसंबर 2022 को लॉन्च हुआ Perplexity। लॉन्च के तुरंत बाद ही 3000+ क्वेरीज पर दिन आ गईं। कुछ महीनों में ये मिलियंस में पहुंच गई। कंपनी ने पहले साल में 1000x ग्रोथ देखी!
निवेशकों का भरोसा: Nvidia, Jeff Bezos से लेकर SoftBank तक
इस रैपिड ग्रोथ को देखकर Nvidia, Jeff Bezos, SoftBank जैसे बड़े निवेशक जुड़ गए। 2025 तक वैल्यूएशन $20 बिलियन पहुंच गई। आज Perplexity पर 30 मिलियन+ डेली सर्चेस हो रही हैं, और ये दुनिया के सबसे तेज ग्रो करने वाले AI स्टार्टअप्स में से एक है।
Google और OpenAI ऐसा क्यों नहीं करते?
Google का बिजनेस मेनली ऐड्स से चलता है। अगर वो Perplexity जैसा डायरेक्ट जवाब देना शुरू कर दे, तो यूजर्स लिंक्स पर क्लिक नहीं करेंगे – ऐड रेवेन्यू गिर जाएगा।
OpenAI/Microsoft API से पैसे कमाते हैं। अगर वो खुद ऐसा न्यूट्रल सर्च टूल बनाएं, तो अपने कस्टमर्स से कॉम्पिटिशन होगा।
अरविंद ने इसी गैप को भरा – एक इंडिपेंडेंट AI आंसर इंजन बनाकर।
अरविंद का विजन: फ्यूचर सर्च नहीं, AI आंसर इंजन का है
अरविंद का मानना है कि आने वाला समय सिर्फ सर्च का नहीं, बल्कि समझने, कंपेयर करने और सीखने का है। यूजर्स ऐसे टूल्स की तरफ जाएंगे जो सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि इनसाइट्स दें।
ये कहानी साबित करती है कि क्लियर विजन, सही डायरेक्शन और हार्ड वर्क से मिडिल-क्लास बैकग्राउंड वाला कोई भी लड़का दुनिया के सबसे बड़े जायंट्स को चैलेंज कर सकता है।
अगर तुम भी AI या स्टार्टअप में इंटरेस्टेड हो, तो Perplexity.ai ट्राई करके देखो – शायद यही वो टूल है जो तुम्हारा सर्च गेम चेंज कर दे!
क्या लगता है? कमेंट में बताओ – क्या Perplexity सच में Google को टक्कर दे पाएगा?
