⚠️ Big Winner जैसे ऐप्स: यह कोई गेम नहीं, बल्कि एक बड़ा धोखा है
आजकल सोशल मीडिया पर कई ऐसे ऐप और प्लेटफॉर्म चल रहे हैं जो खुद को गेम, ऑनलाइन इनकम, या पैनल वर्क बताते हैं।
Big Winner उनमें से सिर्फ़ एक नाम है। असल में ऐसे दर्जनों ऐप मार्केट में चल रहे हैं।
इनका काम करने का तरीका लगभग एक जैसा होता है, और अंत में नुकसान हमेशा आम लोगों का ही होता है।
🔍 पैनल वर्क के नाम पर असल में क्या कराया जाता है?
इन ऐप्स में आपको बताया जाता है:
- किसी भी व्यक्ति का बैंक अकाउंट जोड़ सकते हो
- आपके अकाउंट में अपने आप ट्रांजैक्शन होंगे
- हर ट्रांजैक्शन पर 2% या 3% कमीशन मिलेगा
शुरुआत में सब कुछ आसान लगता है, लेकिन सच्चाई यह है कि:
- पैसा आपका नहीं होता
- ट्रांजैक्शन आपने नहीं किया होता
- लेकिन अकाउंट आपका होता है
यहीं से आप कानूनी मुसीबत में फँस जाते हैं।
🎯 ज़्यादातर स्टूडेंट्स और बेरोज़गार युवाओं को ही क्यों निशाना बनाया जाता है?
आज का ज़माना सोशल मीडिया का है।
Instagram, Facebook, Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसे ads दिखाए जाते हैं:
- घर बैठे कमाई
- बिना निवेश के इनकम
- Flipkart / Amazon का पेमेंट बताया जाता है
स्टूडेंट्स और युवा:
- कानून नहीं समझते
- जल्दी पैसे कमाने की सोच रखते हैं
- जोखिम को हल्के में लेते हैं
इसी कमजोरी का फायदा उठाया जाता है।
🧠 यह मनी लॉन्ड्रिंग कैसे बन जाती है? (सरल उदाहरण)
मान लो किसी व्यक्ति के साथ ₹1,00,000 का ऑनलाइन फ्रॉड हुआ।
अब क्या किया जाता है?
- कंपनी के पास कई लोगों के रेंट पर लिए हुए बैंक अकाउंट होते हैं
- पैसे को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर
- अलग-अलग अकाउंट में भेजा जाता है
- फिर उन पैसों को बार-बार घुमाया जाता है
इससे होता क्या है?
- असली फ्रॉड करने वाला छिप जाता है
- साइबर क्राइम को ट्रैक करने में दिक्कत होती है
- कई बेगुनाह लोगों के अकाउंट फ्रीज़ हो जाते हैं
❗ सबसे अहम बात: पकड़ा कौन जाता है?
बहुत लोग सोचते हैं कि: “हमने तो फ्रॉड नहीं किया”
लेकिन सच्चाई यह है:
- जिस अकाउंट से ट्रांजैक्शन हुआ
- जिसकी KYC लगी है
- जिसके नाम से पैसा घूमा
कानून उसी को ज़िम्मेदार मानता है।
जो लोग यह ऐप चला रहे हैं:
- फेक सिम इस्तेमाल करते हैं
- फेक फोटो और नाम रखते हैं
- कोई पहचान नहीं छोड़ते
इसलिए वे बच जाते हैं और फँसता है आम आदमी।
🧨 “यह तो गेमिंग का फंड है” कहने वालों की सच्चाई
बहुत लोग कहते हैं कि यह पैसा “गेमिंग का फंड” है।
अगर सच में ऐसा है तो:
- कंपनी का लिखित एग्रीमेंट कहाँ है?
- GST बिल कहाँ है?
- बैंक या RBI की मंज़ूरी कहाँ है?
इन सवालों का कोई जवाब नहीं मिलता,
क्योंकि यह सिर्फ़ लोगों को बहकाने का तरीका है।
🚨 एक Big Winner नहीं, ऐसे सैकड़ों ऐप हैं
आज Big Winner है,
कल कोई और नाम होगा।
नाम बदलते रहते हैं,
लेकिन तरीका वही रहता है:
- अकाउंट रेंट पर लेना
- ट्रांजैक्शन घुमाना
- कमीशन का लालच देना
इसमें जो लोग अंदर बैठे हैं, वे सुरक्षित रहते हैं,
और बाहर वाला आदमी जेल, अकाउंट फ्रीज़ और केस में फँस जाता है।
✅ आपको क्या करना चाहिए?
- कभी भी अपना बैंक अकाउंट किसी को न दें
- पैनल वर्क या “ऑटो ट्रांजैक्शन” वाले काम से दूर रहें
- अगर कोई ऐसा काम करता दिखे तो साइबर क्राइम में शिकायत करें
- दूसरों को फँसाने वाला एजेंट न बनें
🔚 आख़िरी चेतावनी
थोड़े पैसों की लालच में:
- आपका बैंक अकाउंट जा सकता है
- आपका करियर खराब हो सकता है
- आपकी आज़ादी भी जा सकती है
जागरूक बनिए।
इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें।
क्योंकि ऐसे ऐप एक नहीं, बहुत सारे हैं।