दोस्तों, 13 जनवरी 2026 को UGC ने "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026" नोटिफाई किया। ये रूल्स कास्ट-बेस्ड डिस्क्रिमिनेशन रोकने के नाम पर आए हैं—खासकर SC, ST और OBC स्टूडेंट्स के लिए। लेकिन जनरल कैटेगरी वाले पूछ रहे हैं: हमारी सुरक्षा कहाँ है?
**फैक्ट 1: डिस्क्रिमिनेशन की डेफिनिशन एक तरफा**
रूल्स में "caste-based discrimination" सिर्फ SC/ST/OBC के खिलाफ डिफाइन किया गया है (Regulation 3(c))। जनरल कैटेगरी वाले अगर कास्ट के आधार पर डिस्क्रिमिनेट होते हैं, तो वो कवर नहीं होता। ब्रॉड डेफिनिशन (religion, gender, disability वगैरह) तो सबके लिए है, लेकिन कास्ट वाला हिस्सा सिर्फ रिजर्व्ड के लिए। ये साफ़ bias लगता है—जैसे जनरल वाले हमेशा 'oppressor' ही रहेंगे।
**फैक्ट 2: कोई सेफगार्ड फॉल्स कंप्लेंट्स के खिलाफ नहीं**
कंप्लेंट पर 24 घंटे में मीटिंग, 15 दिन में रिपोर्ट, 7 दिन में एक्शन। फास्ट ट्रैक तो अच्छा, लेकिन अगर कोई झूठी शिकायत कर दे? कोई स्पेसिफिक पेनल्टी नहीं। जनरल स्टूडेंट फंस सकता है—रिपुटेशन खराब, पढ़ाई रुक सकती है, या पुलिस केस भी। SC/ST एक्ट में भी यही प्रॉब्लम है, और कोर्ट्स ने कई बार फॉल्स केस क्वाश किए हैं। यहाँ तो वो भी नहीं।
**फैक्ट 3: कमिटी और सिस्टम में बैलेंस की कमी**
हर यूनिवर्सिटी में Equal Opportunity Centre (EOC), Equity Committee, Equity Squads, 24/7 Helpline, Ambassadors—सब बनेंगे। कमिटी में SC/ST/OBC/महिलाओं का रिप्रेजेंटेशन मस्ट, लेकिन जनरल का कोई गारंटी नहीं। NGO/सिविल सोसाइटी वाले भी आ सकते हैं। डर है कि ये सिस्टम एक तरफा इस्तेमाल होगा।
**फैक्ट 4: प्रोटेस्ट और पॉलिटिक्स का कनेक्शन**
दिल्ली UGC ऑफिस, लखनऊ, इंदौर, आगरा—हर जगह जनरल स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं। #UGCRollBack ट्रेंडिंग। कुछ BJP लीडर्स ने भी इस्तीफे दिए। ये 2026-27 के लोकल/पंचायत इलेक्शन्स से पहले आया—कई का मानना है कि OBC वोट बैंक को खुश करने की कोशिश है। पहले SC/ST/OBC बीजेपी से दूर थे, अब जनरल भी नाराज होकर दूर जा रहे हैं।
**फैक्ट 5: गवर्नमेंट की सफाई**
एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा: "कोई हैरासमेंट नहीं होगा, मिसयूज नहीं होने देंगे। जनरल के लिए भी प्रोविजन ऐड करेंगे।" लेकिन नोटिफिकेशन में अभी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में भी PILs पेंडिंग हैं—कई कह रहे हैं ये रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन है।
**निष्कर्ष:**
ये रूल्स अच्छे इरादे से आए होंगे (रोहित वेमुला, पायल तड़वी जैसे केस से), लेकिन इम्प्लीमेंटेशन में बैलेंस नहीं। जनरल कैटेगरी को लग रहा है कि हमारी आवाज दबाई जा रही है, और ये सिर्फ वोट पॉलिटिक्स है। अगर सच्चे इक्विटी चाहिए, तो डेफिनिशन न्यूट्रल करो, फॉल्स कंप्लेंट्स पर पेनल्टी लगाओ, और सबके लिए बराबर प्रोटेक्शन दो।
तुम क्या सोचते हो? कमेंट्स में बताओ। अगर रोल बैक नहीं हुआ, तो आगे क्या?
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